🕌 जामा मस्जिद जाने की योजना
मेरा नाम इल्मा है। जब पहली बार घर में यह बात हुई कि हम जामा मस्जिद घूमने चलेंगे, तो मैं बहुत खुश हुई। उस जगह के बारे में मैंने बहुत सुना था और हमेशा से वहाँ जाने का मन था।
आख़िरकार तय हुआ कि हम आने वाले जुम्मे के दिन जामा मस्जिद जाएंगे। मेरे साथ मेरी खाला, फुप्पो और उनकी फैमिली भी जा रही थी। मुझे सबसे ज़्यादा खुशी इसलिए थी क्योंकि मेरी खाला की बेटी मेरी सबसे अच्छी दोस्त है।
🚇 सफर की शुरुआत
वो दिन आ ही गया! हम सबने तय किया कि हम मेट्रो से जामा मस्जिद जाएंगे। सफर बहुत मज़ेदार था — सब हँसी-मज़ाक करते हुए जा रहे थे।
🌅 जामा मस्जिद की पहली झलक

वहाँ पहुँचकर जब मैंने पहली बार मस्जिद को देखा, तो दिल खुश हो गया। ऐसा लगा जैसे मैं किसी और ही दुनिया में पहुँच गई हूँ — बहुत सुकून और शांति का माहौल था।
🧿 वुज़ू और नमाज़
सबसे पहले हमने वहाँ की बावली से वुज़ू किया और फिर नमाज़ अदा की। नमाज़ पढ़ने के बाद जो सुकून मिला, वो शब्दों में बताना मुश्किल है।

🍛 लज़ीज़ खाना और मस्ती
उसके बाद हमने वहाँ का खाना खाया, जो वाकई बहुत लज़ीज़ था। मुझे वहाँ का खाना बहुत पसंद आया। खाने के बाद हमने बहुत सारी तस्वीरें खींचीं और मैं, मेरे भाई-बहन सबने मिलकर खूब मस्ती की।
🛍️ बाज़ार की सैर
फिर हम बाहर आए और बाज़ार में घूमे। वहाँ से हमने बहुत सारी चीज़ें खरीदीं — चूड़ियाँ, इत्र और कुछ खाने-पीने की चीज़ें भी।
🏠 नानाजी के घर की याद
वापस लौटते वक्त अचानक याद आया कि यही इलाका हमारे नाना जी का घर भी है। फिर हमने सोचा, चलो वहाँ भी चलते हैं।
हम सब वहाँ गए, नाना जी के घर पर बैठकर बातें कीं, हँसे और रात का खाना भी साथ में खाया।
🌙 यादगार दिन का अंत
रात को जब हम घर लौटे, तो थकान तो बहुत थी, पर मन बहुत खुश था। वो दिन हमेशा मेरी यादों में बस गया।

