मेरा नाम गुलिस्तान है और में दिल्ली की रहने वाली हूँ। जब मैं पहली बार लाल किला देखने गई, तो सच कहूँ तो उसकी विशालता देखकर दंग रह गई। यह जगह इतनी बड़ी है कि घूमते-घूमते थकान होने लगती है। अंदर कोई गाड़ियाँ नहीं जातीं, इसलिए सब कुछ पैदल ही देखना पड़ता है। लेकिन जब उसकी दीवारों और दरवाज़ों को करीब से देखती थी, तो लगता था जैसे हर ईंट कोई कहानी सुना रही हो। उसकी बनावट इतनी खूबसूरत और बारीक है कि तारीफ किए बिना रहना मुश्किल है।
🖼️ इतिहास की झलक — एग्ज़िबिशन
अंदर कुछ एग्ज़िबिशन लगी थीं, जहाँ पुराने ज़माने की चीज़ें और उनसे जुड़ी जानकारी रखी थी। पुराने सिक्के, तलवारें, और राजाओं के ज़माने की वस्तुएँ देखकर ऐसा लगा जैसे मैं किताबों से निकलकर असली इतिहास में पहुँच गई हूँ। अगर किसी को हिस्ट्री पसंद है, तो यह जगह उसके लिए स्वर्ग जैसी है।
🛍️ एक प्यारी सी मार्किट

किले के अंदर ही एक छोटी मगर बहुत प्यारी मार्किट भी है। वहाँ की चीज़ें बहुत यूनिक और एस्थेटिक हैं — जैसे आजकल सबको पसंद आती हैं। मुझे वहाँ से कुछ छोटी ज्वेलरी और हैंडीक्राफ्ट आइटम बहुत पसंद आए। यह मार्किट लड़कियों के लिए तो जैसे एक छोटा सा खज़ाना है!
☕ सुकून, बातें और खाना
इतिहास देखने के बाद अगर थोड़ी देर बैठकर आराम करना हो, तो वहाँ पार्क जैसी जगहें भी हैं जहाँ पेड़ों की छाँव में बैठा जा सकता है। खाने के लिए भी अच्छी जगहें हैं — जहाँ कुछ स्नैक्स लेते हुए दोस्तों के साथ बातें करना बहुत अच्छा लगता है। बच्चों के लिए खेलने की भी जगह है, तो परिवार के साथ आना और भी मज़ेदार हो जाता है।
🏙️ आसपास की मशहूर जगहें
लाल किले तक पहुँचना बहुत आसान है, क्योंकि यह दिल्ली के बीचोंबीच है। जब मैं वहाँ से बाहर निकली, तो सोचा — दिल्ली आई हूँ तो चांदनी चौक कैसे मिस कर सकती हूँ!
सामने ही उसकी गलियाँ थीं, जहाँ का खाना, मिठाइयाँ और भीड़ सब कुछ अपने आप में अलग अनुभव देते हैं। थोड़ी दूर चलकर जामा मस्जिद पहुँची — वो जगह इतनी शांत और खूबसूरत लगी कि बस वहीं कुछ देर बैठकर सब नज़ारे देखती रही।
✨ मेरा अनुभव
लाल किला सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक एहसास है — इतिहास, खूबसूरती और सुकून का मेल। अगर कभी दिल्ली आओ, तो इस जगह को ज़रूर देखो। यहाँ हर दीवार, हर कोना, तुम्हें भारत की कहानी सुनाता है।

